कीव (उत्तर वर्ल्ड ब्यूरो) : यूक्रेन में जारी भीषण जंग के बीच राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की की सरकार एक बड़े आंतरिक संकट में फंस गई है। राष्ट्रपति के सबसे भरोसेमंद और पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ एंड्री यरमाक पर करोड़ों डॉलर के भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के संगीन आरोप लगे हैं। इस घोटाले ने न केवल यूक्रेन की राजनीति में भूचाल ला दिया है बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज़ेलेंस्की प्रशासन की साख पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एंड्री यरमाक को ज़ेलेंस्की के बाद यूक्रेन का सबसे ताकतवर व्यक्ति माना जाता था।
क्या है मनी लॉन्ड्रिंग का पूरा मामला
नेशनल एंटी करप्शन ब्यूरो ऑफ यूक्रेन की जांच के अनुसार एंड्री यरमाक पर लगभग 10.5 मिलियन डॉलर यानी करीब 460 मिलियन यूक्रेनी रिव्निया की हेराफेरी का आरोप है। अभियोक्ताओं का दावा है कि यरमाक ने एक संगठित आपराधिक समूह के साथ मिलकर कीव के पास एक लग्जरी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में अवैध धन का निवेश किया है। जांच एजेंसियों को अंदेशा है कि यह पैसा यूक्रेन की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी एनरगोएटम से चोरी किया गया हो सकता है। इस पूरे मामले की जांच ऑपरेशन मिडस के तहत की जा रही है।
कौन से बड़े नाम जांच के घेरे में हैं
इस हाई प्रोफाइल भ्रष्टाचार मामले में केवल यरमाक ही अकेले नहीं हैं। ज़ेलेंस्की के कई पुराने बिजनेस पार्टनर और सरकारी अधिकारी भी जांच की रडार पर हैं। इसमें तिमुर मिंडिच का नाम सबसे ऊपर है जो ज़ेलेंस्की के पुराने व्यापारिक साझेदार रहे हैं। उन पर सरकारी कंपनी में 100 मिलियन डॉलर के रिश्वत घोटाले का मास्टरमाइंड होने का आरोप है और वे फिलहाल फरार हैं। इसके अलावा पूर्व उप प्रधानमंत्री ओलेक्सी चेर्नीशोव और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख रुस्तम उमेरोव से भी पूछताछ की जा रही है।
अदालत की कार्यवाही और सरकार पर बढ़ता दबाव
कोर्ट में सुनवाई के दौरान एंड्री यरमाक ने खुद पर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। उन्होंने दावा किया कि वे एक वकील रहे हैं और उन्होंने हमेशा कानून का सम्मान किया है। हालांकि जांच एजेंसियां उन्हें हिरासत में लेने और उन पर भारी जुर्माना लगाने की मांग कर रही हैं। भले ही खुद राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की पर अब तक कोई सीधा आरोप नहीं लगा है लेकिन उनके सबसे वफादार लोगों का भ्रष्टाचार में फंसना उनकी सरकार के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है।
वैश्विक सहायता पर पड़ सकता है बुरा असर
यूक्रेन फिलहाल रूस के खिलाफ युद्ध लड़ने के लिए पूरी तरह से पश्चिमी देशों की सैन्य और आर्थिक मदद पर टिका है। अमेरिका और यूरोपीय देश यह मदद इसी शर्त पर दे रहे हैं कि यूक्रेन अपनी सरकार से भ्रष्टाचार को पूरी तरह खत्म करेगा। ऐसे में इतने बड़े घोटाले का सामने आना यूक्रेन के विदेशी संबंधों और मिलने वाली मदद के लिए घातक साबित हो सकता है। दुनिया भर की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की अपने करीबियों पर लगे इन दागों से कैसे निपटते हैं।