बुधवार, 22 अप्रैल 2026
prayagraj
प्रयागराज

इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 30 साल की सेवा के बाद बिना ठोस आधार बर्खास्तगी गलत

By Uttar World Desk

21 अप्र, 2026 | 11:25 बजे
इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 30 साल की सेवा के बाद बिना ठोस आधार बर्खास्तगी गलत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कर्मचारी हितों की रक्षा करते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि दशकों की बेदाग सेवा के बाद किसी कर्मचारी को बिना किसी कानूनी आधार के नौकरी से हटाना पूरी तरह गलत है। कोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर के एक हेडमास्टर, मुकेश कुमार शर्मा की सेवा समाप्ति के आदेश को रद्द करते हुए उनकी बहाली का रास्ता साफ कर दिया है। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि याची को अपनी बात रखने का उचित अवसर दिए बिना की गई यह कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और 'उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक अनुशासन एवं अपील नियमावली' का खुला उल्लंघन है।

मामला मुकेश कुमार शर्मा की 1997 में हुई नियुक्ति से जुड़ा है, जिन्हें 2025 में बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने इस आधार पर बर्खास्त कर दिया था कि उन्होंने 1993-94 के एक ही सत्र में इंटरमीडिएट और शारीरिक शिक्षा प्रमाणपत्र (C.P.Ed) की दो डिग्रियां हासिल की थीं। हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के 'कुलदीप कुमार पाठक' केस का हवाला दिया और कहा कि यदि उस समय दो परीक्षाओं में एक साथ बैठने पर कोई वैधानिक रोक नहीं थी, तो इसे अयोग्यता का आधार नहीं माना जा सकता। अदालत ने बीएसए के आदेश को मनमाना और दोषपूर्ण करार देते हुए कहा कि याची के शैक्षिक प्रमाण पत्र आज भी वैध हैं और उन्हें किसी सक्षम अधिकारी ने रद्द नहीं किया है, इसलिए लगभग 30 वर्षों की लंबी सेवा के बाद ऐसी बर्खास्तगी न्यायसंगत नहीं है।

Uttar World से जुड़ें

Like Page