ब्यूनस आयर्स (उत्तर वर्ल्ड ब्यूरो) : अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली की आर्थिक नीतियों और शिक्षा बजट में की गई भारी कटौती के खिलाफ देश भर में विरोध की लहर दौड़ गई है। मंगलवार को राजधानी ब्यूनस आयर्स सहित देश के कई बड़े शहरों में लाखों छात्रों, शिक्षकों और आम नागरिकों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि माइली सरकार की 'चेनसॉ' (Chainsaw) नीति देश की मुफ्त उच्च शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर रही है। ब्यूनस आयर्स विश्वविद्यालय के अनुसार, केवल राजधानी में ही लगभग 6 लाख लोग इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।
क्यों हो रहा है इतना बड़ा विरोध प्रदर्शन
राष्ट्रपति जेवियर माइली ने कार्यभार संभालने के बाद से ही सरकारी खर्चों में भारी कटौती का अभियान चलाया है। माइली का तर्क है कि देश की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए कड़े वित्तीय सुधार और फिजूलखर्ची को रोकना जरूरी है। हालांकि, इन नीतियों का सबसे बुरा असर सरकारी विश्वविद्यालयों पर पड़ा है:
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वेतन में भारी गिरावट: शिक्षकों के संघों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में प्रोफेसरों और स्टाफ के वेतन की क्रय शक्ति (Purchasing Power) में लगभग 33 से 40 प्रतिशत तक की गिरावट आई है।
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बजट में कटौती: सरकार ने विश्वविद्यालयों के परिचालन खर्चों और बुनियादी ढांचे के लिए फंड में भारी कमी की है।
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फंडिंग कानून पर रोक: संसद ने पिछले साल विश्वविद्यालयों के खर्चों को महंगाई के हिसाब से बढ़ाने के लिए एक कानून पास किया था, लेकिन माइली सरकार ने इसे लागू करने से इनकार कर दिया और इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले गई है।
शिक्षा को बताया जा रहा है देश का गौरव
ब्यूनस आयर्स के ऐतिहासिक प्लाजा डी मायो (Plaza de Mayo) में जमा हुई भीड़ ने राष्ट्रपति महल की ओर मार्च किया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में 'विज्ञान महंगा नहीं है, अज्ञानता महंगी है' जैसे नारे लिखी तख्तियां थीं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अर्जेंटीना में मुफ्त उच्च शिक्षा 1949 से एक अधिकार है और इसी व्यवस्था ने देश को पांच नोबेल पुरस्कार विजेता दिए हैं। लोगों का मानना है कि शिक्षा में कटौती करना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।
राजनीतिक संकट और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका
यह माइली सरकार के खिलाफ शिक्षा बजट को लेकर चौथा बड़ा प्रदर्शन है। सरकार के अंडरसेक्रेटरी एलेजांद्रो अल्वारेज़ ने इन प्रदर्शनों को 'पूरी तरह से राजनीतिक' करार दिया है। वहीं, दूसरी ओर विपक्षी दल और छात्र संगठन इसे अधिकारों की लड़ाई बता रहे हैं। मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है, और प्रदर्शनकारियों ने मंच से अपील की है कि देश की सर्वोच्च अदालत जनता की इस पुकार को सुने और शिक्षा के फंड को बहाल करने का आदेश दे।
निष्कर्ष : अर्जेंटीना की अर्थव्यवस्था इस समय गिरती जीडीपी और बढ़ती बेरोजगारी के दौर से गुजर रही है। ऐसे में राष्ट्रपति माइली के कड़े सुधारों ने मध्यम और निम्न वर्ग के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शिक्षा के क्षेत्र में चल रहा यह विवाद माइली सरकार के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया है।