ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते (Lai Ching-te) अपनी रणनीतिक यात्रा के तहत अफ्रीका के एकमात्र राजनयिक सहयोगी देश 'एस्वातिनी' (Eswatini) पहुँच गए हैं। यह यात्रा तब हुई है जब कुछ ही दिनों पहले ताइवान सरकार ने चीन के भारी दबाव के कारण इस दौरे के रद्द होने की बात कही थी।
ताइवान सरकार ने पहले आरोप लगाया था कि चीन अफ्रीकी देशों पर दबाव बना रहा है ताकि राष्ट्रपति लाई चिंग-ते के विमान को उनके हवाई क्षेत्र (Airspace) से न गुजरने दिया जाए। इस बाधा के बावजूद राष्ट्रपति ने एस्वातिनी पहुँचकर सबको चौंका दिया। उन्होंने मीडिया से कहा कि यह दौरा "राजनयिक और राष्ट्रीय सुरक्षा टीमों द्वारा किए गए दिनों के सावधानीपूर्ण प्रबंधों" का परिणाम है। हालांकि, उन्होंने इस बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी कि वे चीन की घेराबंदी को पार कर एस्वातिनी कैसे पहुँचे।
चीन ने इस पूरी यात्रा को एक "स्टोअवे-स्टाइल एस्केप फार्स" (चोरी-छिपे भागने वाला तमाशा) करार दिया है। गौरतलब है कि चीन, ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है और उसका तर्क है कि ताइवान को किसी भी देश के साथ स्वतंत्र राजनयिक संबंध रखने का कोई अधिकार नहीं है।
इस विवाद पर अमेरिका ने ताइवान का समर्थन किया है। अमेरिकी विदेश विभाग (US State Department) के प्रवक्ता ने इस यात्रा को "रूटीन" बताया और कहा कि इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। प्रवक्ता के अनुसार ताइवान का हर लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति अपने राजनयिक भागीदारों के दौरे पर जाता रहा है। इससे पहले राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने भी 2018 और 2023 में एस्वातिनी का दौरा किया था। ताइवान, अमेरिका और कई अन्य देशों के लिए एक भरोसेमंद और सक्षम भागीदार है।
एस्वातिनी पहुँचने पर ताइवान के राष्ट्रपति का भव्य स्वागत किया गया। तस्वीरों में एस्वातिनी के प्रधानमंत्री रसेल डलामिनी (Russell Dlamini) को उनका स्वागत करते हुए देखा गया। राष्ट्रपति के इस उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल में ताइवान के विदेश मंत्री लिन चिया-लुंग और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सलाहकार एलेक्स हुआंग भी शामिल हैं।