बीजिंग (उत्तर वर्ल्ड ब्यूरो) : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को अपनी दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचे हैं। राष्ट्रपति पद पर वापसी के बाद ट्रंप की यह पहली चीन यात्रा है, जिसे दुनिया भर के बाजार और कूटनीतिज्ञ बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देख रहे हैं। गुरुवार और शुक्रवार (14-15 मई) को होने वाली इस शिखर वार्ता में ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच व्यापार, तकनीक और मध्य पूर्व में जारी तनाव जैसे कई गंभीर मुद्दों पर सीधी बातचीत होगी। जानकारों का मानना है कि यह बैठक तय करेगी कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं आने वाले समय में सहयोग करेंगी या फिर एक नए व्यापार युद्ध की ओर बढ़ेंगी।
व्यापार और टैरिफ पर टिकी सबकी नजरें
इस शिखर सम्मेलन का सबसे मुख्य मुद्दा 'व्यापार युद्ध' (Trade War) है। पिछले एक साल में दोनों देशों ने एक-दूसरे के सामानों पर 100 प्रतिशत से भी अधिक टैरिफ लगाए हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। ट्रंप का मुख्य उद्देश्य चीन को अमेरिकी उत्पादों, विशेष रूप से कृषि उत्पादों और बोइंग (Boeing) विमानों की खरीद बढ़ाने के लिए राजी करना है। इसके साथ ही, भविष्य के विवादों को सुलझाने के लिए एक 'बोर्ड ऑफ ट्रेड' बनाने पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
ताइवान और सेमीकंडक्टर का पेचीदा मसला
ताइवान हमेशा से चीन और अमेरिका के बीच सबसे बड़ा विवाद रहा है। शी जिनपिंग ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि ताइवान का मुद्दा चीन के लिए 'रेड लाइन' है और वे अमेरिका द्वारा ताइवान को हथियारों की बिक्री का कड़ा विरोध करेंगे। दूसरी ओर, ताइवान दुनिया का सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर हब है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक के लिए अनिवार्य है। ट्रंप इस बैठक में ताइवान को हथियारों की आपूर्ति और वहां की सुरक्षा को लेकर अमेरिका का रुख स्पष्ट कर सकते हैं।
ईरान युद्ध और ऊर्जा संकट की छाया
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब मध्य पूर्व में ईरान के साथ जारी संघर्ष ने वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल ला दिया है। अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान से तेल खरीदना बंद करे या कम करे ताकि तेहरान पर दबाव बनाया जा सके। हालांकि, ट्रंप ने बीजिंग पहुंचने से पहले कहा कि ईरान का मुद्दा शी जिनपिंग के साथ उनकी बातचीत पर हावी नहीं होगा, क्योंकि वे अपना पूरा ध्यान व्यापार और आर्थिक मजबूती पर केंद्रित करना चाहते हैं।
तकनीक और दुर्लभ खनिजों पर खींचतान
चीन ने हाल ही में 'रेयर अर्थ मिनरल्स' (दुर्लभ खनिज) के निर्यात पर पाबंदियां लगाई हैं, जो इलेक्ट्रिक वाहनों और हाई-टेक गैजेट्स के लिए बहुत जरूरी हैं। वहीं, अमेरिका ने चीनी टेक कंपनियों पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। शी जिनपिंग की कोशिश होगी कि वे अमेरिका को इन पाबंदियों में ढील देने और चीनी कंपनियों को अमेरिकी बाजार में फिर से जगह देने के लिए मना सकें।
निष्कर्ष: बीजिंग का 'टेम्पल ऑफ हेवन' इस ऐतिहासिक मुलाकात का गवाह बनेगा। यह शिखर सम्मेलन केवल दो नेताओं की मुलाकात नहीं है, बल्कि यह आने वाले दशकों की वैश्विक व्यवस्था (Global Order) को आकार देने वाली घटना है। क्या ट्रंप और शी जिनपिंग एक 'G2' जैसा नया गठबंधन बना पाएंगे या फिर प्रतिस्पर्धा और बढ़ेगी, इसका जवाब अगले 48 घंटों में मिल जाएगा।