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अमेरिका और ईरान द्वारा जहाजों की जब्ती अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन

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By Uttar World Desk

25 अप्र, 2026 | 04:07 बजे
अमेरिका और ईरान द्वारा जहाजों की जब्ती अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
अमेरिका और ईरान द्वारा जहाजों की जब्ती अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के सबसे बड़े संगठन, इंटरनेशनल चैंबर ऑफ शिपिंग (ICS) ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही 'जहाज जब्ती' की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। संगठन ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का अपमान बताते हुए सभी चालक दल के सदस्यों (Crews) को तुरंत रिहा करने की मांग की है।

पिछले एक सप्ताह में दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है अमेरिकी रक्षा विभाग ने हिंद महासागर में ईरान से जुड़े दो जहाजों, 'मैजेस्टिक एक्स' (Majestic X) और 'तिफानी' (Tifani) को जब्त किया है। अमेरिका का दावा है कि ये जहाज प्रतिबंधों का उल्लंघन कर ईरानी तेल ले जा रहे थे। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने पनामा के झंडे वाले 'MSC फ्रांसेस्का' और ग्रीक स्वामित्व वाले 'एपामिनोंडास' को होर्मुज के पास से अपने कब्जे में ले लिया है। ईरान का आरोप है कि ये जहाज बिना परमिट के चल रहे थे और नेविगेशन सिस्टम के साथ छेड़छाड़ कर रहे थे।

ICS के समुद्री निदेशक जॉन स्टॉवर्ट ने अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में कई गंभीर सवाल उठाए हैं स्टॉवर्ट ने कहा कि जहाजों को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए जब्त किया जाना गलत है। इन जहाजों पर सवार निर्दोष नाविकों का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है, फिर भी उन्हें एक तरह से "नजरबंद" रखा गया है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए 'टोल' वसूलने की कोशिश को ICS ने पूरी तरह अवैध बताया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आज होर्मुज में ऐसा हुआ, तो कल को मलक्का या जिब्राल्टर जैसे महत्वपूर्ण रास्तों पर भी संकट खड़ा हो जाएगा। होर्मुज का रास्ता बंद होने के कारण दुनिया भर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं। युद्ध से पहले यहाँ से रोज़ाना 129 जहाज गुजरते थे, जो अब घटकर केवल 5 जहाज रह गए हैं।

इस तनाव का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $106 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। कई देशों ने आपातकालीन ऊर्जा बचत उपाय (Energy-saving measures) लागू कर दिए हैं।

समुद्री व्यापार की स्वतंत्रता वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यदि अमेरिका और ईरान ने कूटनीतिक बातचीत के जरिए इसे नहीं सुलझाया, तो आने वाले दिनों में वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह ठप हो सकती है, जिसका असर भारत सहित पूरी दुनिया के बाजारों पर पड़ेगा।

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