यरूशलेम/दुबई | उत्तरवर्ल्ड न्यूज डेस्क : इजरायल के भीतर रहने वाले फिलिस्तीनी नागरिकों के लिए साल 2026 की शुरुआत एक खौफनाक मंजर के साथ हुई है। अल जजीरा की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल के फिलिस्तीनी बहुल शहरों में अपराध और हत्याओं का ग्राफ रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है। स्थानीय लोगों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इजरायली पुलिस 'टू-टियर पुलिसिंग' (दोहरे दर्जे की पुलिसिंग) की नीति अपना रही है, जहाँ यहूदी इलाकों में तो सुरक्षा चाक-चौबंद रहती है, लेकिन फिलिस्तीनी कस्बों को आपराधिक गिरोहों के भरोसे छोड़ दिया गया है। उत्तरवर्ल्ड न्यूज को मिली जानकारी के मुताबिक, इस साल के शुरुआती चार महीनों में ही दर्जनों फिलिस्तीनी नागरिक आपसी गैंगवार और संगठित अपराध की भेंट चढ़ चुके हैं।
इस 'क्राइम एपिडेमिक' या अपराध की महामारी के पीछे की जड़ें काफी गहरी हैं। रिपोर्ट बताती है कि इन शहरों में अवैध हथियारों की बाढ़ आ गई है, और आपराधिक परिवार खुलेआम रंगदारी और तस्करी का धंधा चला रहे हैं। फिलिस्तीनी समुदाय के नेताओं का तर्क है कि इजरायली सुरक्षा बल, जो फिलिस्तीनी प्रदर्शनकारियों को रोकने या राजनीतिक गतिविधियों को कुचलने में बेहद सक्रिय रहते हैं, वही बल इन आपराधिक गिरोहों पर नकेल कसने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं। यह 'उदासीनता' अनजाने में नहीं है, बल्कि आलोचक इसे एक रणनीतिक विफलता मानते हैं, जिसका उद्देश्य फिलिस्तीनी समाज को अंदरूनी तौर पर कमजोर और अस्थिर करना है।
तथ्यों पर गौर करें तो इजरायल की कुल आबादी का करीब 21 प्रतिशत हिस्सा फिलिस्तीनी मूल के लोगों का है, लेकिन देश में होने वाली कुल हत्याओं में से 70 प्रतिशत से अधिक मामले इन्हीं इलाकों से सामने आ रहे हैं। 'दोहरे दर्जे की पुलिसिंग' का सबसे बड़ा सबूत यह है कि जब भी किसी यहूदी नागरिक के खिलाफ अपराध होता है, तो पुलिस कुछ ही घंटों में अपराधियों को पकड़ लेती है, लेकिन फिलिस्तीनी इलाकों में हुई हत्याओं के मामलों में 'अनसुलझी फाइलों' का अंबार लगा हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे अब अपने ही घरों में सुरक्षित महसूस नहीं करते और सड़कों पर निकलना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो इजरायल की वर्तमान दक्षिणपंथी सरकार पर भी सवाल उठ रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्रालय, जो पुलिस बल को नियंत्रित करता है, उन मंत्रियों के हाथों में है जिनकी छवि फिलिस्तीनी विरोधी मानी जाती है। अल जजीरा की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पुलिस बजट में कटौती और सामुदायिक पुलिसिंग केंद्रों को बंद करने जैसे फैसलों ने अपराधियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं। इसके विरोध में हजारों फिलिस्तीनी नागरिकों ने तेल अवीव और अन्य शहरों में प्रदर्शन कर 'सुरक्षा के समान अधिकार' की मांग की है।
उत्तरवर्ल्ड न्यूज के विश्लेषण के अनुसार, यह संकट केवल कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि बुनियादी मानवाधिकारों का है। जब तक राज्य अपने सभी नागरिकों को रंग, धर्म या पहचान से ऊपर उठकर समान सुरक्षा प्रदान नहीं करता, तब तक हिंसा का यह चक्र थमने वाला नहीं है। फिलिस्तीनी शहरों में फैला यह डर न केवल वहां की सामाजिक संरचना को तोड़ रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ी को भी असुरक्षा और गुस्से के साये में ढकेल रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या इजरायल अपनी पुलिसिंग नीतियों में कोई बड़ा बदलाव करेगा या फिर ये शहर इसी तरह अपराध की आग में झुलसते रहेंगे।
ब्यूरो रिपोर्ट, उत्तरवर्ल्ड न्यूज
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