भारतीय रेल | उत्तर वर्ल्ड न्यूज डेस्क : भारतीय रेलवे ने दिव्यांग यात्रियों के सफर को और अधिक सुगम और सम्मानजनक बनाने के लिए एक बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाया है। रेलवे के नए नियमों के अनुसार, अब दिव्यांग यात्रियों को ट्रेन के आरक्षित और अनारक्षित विशेष कोचों में यात्रा करने के लिए कई अलग-अलग दस्तावेजों की जरूरत नहीं होगी। केवल एक वैध UDID (Unique Disability ID) कार्ड ही उनकी पहचान के लिए पर्याप्त माना जाएगा।
पहले दिव्यांग यात्रियों को अपनी श्रेणी साबित करने के लिए कई तरह के प्रमाण पत्र साथ रखने पड़ते थे, जिससे यात्रा के दौरान काफी परेशानी होती थी। अब रेलवे ने साफ कर दिया है कि भारत सरकार द्वारा जारी किया गया डिजिटल UDID कार्ड ही एकमात्र मान्य दस्तावेज होगा। यात्री अब मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के उन खास कोचों (जैसे SLRD और LSLRD) में आसानी से सीट प्राप्त कर सकेंगे जो विशेष रूप से दिव्यांगजनों के लिए बनाए गए हैं। इन कोचों में चढ़ने-उतरने और बैठने के लिए अतिरिक्त सुविधाएं और जगह होती है। नए नियम के तहत, जिनके पास वैध UDID कार्ड और जनरल टिकट है, वे भी अनारक्षित दिव्यांग कोच में यात्रा के हकदार होंगे।
अब दिव्यांग यात्री IRCTC की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर अपनी 'मास्टर लिस्ट' में UDID कार्ड नंबर अपडेट कर सकते हैं। एक बार कार्ड वेरिफाई हो जाने के बाद, उन्हें हर बार बुकिंग के समय दस्तावेज अपलोड करने या विवरण भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सिस्टम अपने आप उन्हें संबंधित 'कन्सेशन' (किराये में छूट) और लोअर बर्थ की प्राथमिकता प्रदान करेगा।
रेलवे प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह सुविधा केवल उन्हीं यात्रियों के लिए है जिनके पास वैध कार्ड और टिकट है। दिव्यांग कोच का दुरुपयोग करने वाले अन्य यात्रियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है, ताकि वास्तविक जरूरतमंदों को ही इस सुविधा का लाभ मिल सके।
रेलवे का यह डिजिटल प्रयास न केवल दिव्यांगों की यात्रा को बाधा मुक्त बनाएगा, बल्कि उन्हें डिजिटल इंडिया के लाभों से भी सीधे जोड़ेगा। प्रशासन ने सभी स्टेशन मास्टर और टीटीई (TTE) को नए नियमों के बारे में सूचित कर दिया है ताकि यात्रियों को किसी भी तरह की असुविधा न हो।