वॉशिंगटन/बीजिंग (25 अप्रैल, 2026): अमेरिका और चीन के बीच चल रहा 'टेक-वॉर' अब एक नए मोड़ पर आ गया है। अमेरिकी विदेश विभाग (State Department) ने दुनिया भर के अपने राजनयिकों को एक विशेष केबल भेजकर चीनी AI कंपनियों, विशेष रूप से DeepSeek, द्वारा अमेरिकी तकनीक की "औद्योगिक स्तर पर चोरी" के प्रति सचेत रहने की चेतावनी दी है।
रॉयटर्स द्वारा देखी गई इस केबल के अनुसार, अमेरिकी सरकार का आरोप है कि DeepSeek, Moonshot AI और MiniMax जैसी चीनी कंपनियां 'डिस्टिलेशन' (Distillation) नामक तकनीक का गलत इस्तेमाल कर रही हैं। इसमें एक बड़े और महंगे AI मॉडल (जैसे ChatGPT या Gemini) के आउटपुट का उपयोग करके एक छोटा और सस्ता मॉडल तैयार किया जा रहा है। अमेरिका का कहना है कि यह "बिना अनुमति के की गई क्लोनिंग" है, जिससे चीनी कंपनियां बिना अरबों डॉलर खर्च किए अमेरिकी तकनीक के बराबर प्रदर्शन करने वाले मॉडल्स बना रही हैं।
व्हाइट हाउस के विज्ञान और प्रौद्योगिकी सलाहकार माइकल क्रात्सियोस ने एक इंटरनल मेमो में इसे "इंडस्ट्रियल-स्केल कैंपेन" बताया है। उन्होंने कहा कि चीन हजारों फेक अकाउंट्स के जरिए अमेरिकी चैटबॉट्स से डेटा निकाल रहा है ताकि वह अपने मॉडल्स को ट्रेन कर सके।
अमेरिका का दावा है कि ये चीनी मॉडल्स न केवल बौद्धिक संपदा (IP) की चोरी हैं, बल्कि इनमें सुरक्षा प्रोटोकॉल भी हटा दिए गए हैं, जिससे ये खतरनाक हो सकते हैं।
यह विवाद तब और गरमा गया जब DeepSeek ने हाल ही में अपना नया V4 मॉडल पेश किया है, जिसे Huawei चिप्स के लिए खास तौर पर बनाया गया है। वॉशिंगटन में चीनी दूतावास ने इन आरोपों को "पूरी तरह निराधार" और "चीन की प्रगति पर जानबूझकर किया गया हमला" बताया है। कंपनी का कहना है कि उन्होंने केवल वेब-क्रॉलिंग (Web Crawling) के जरिए डेटा इकट्ठा किया है और किसी अमेरिकी कंपनी के सिंथेटिक डेटा का जानबूझकर उपयोग नहीं किया।
अमेरिका के कई राज्यों, ऑस्ट्रेलिया, इटली और दक्षिण कोरिया ने पहले ही DeepSeek के उपयोग पर डेटा सुरक्षा का हवाला देते हुए प्रतिबंध लगा दिए हैं। यह चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के चीन दौरे से ठीक पहले आई है, जिससे दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका है।
AI की इस होड़ में तकनीक चोरी के आरोप भविष्य में ग्लोबल टेक मार्केट को दो हिस्सों में बांट सकते हैं। एक तरफ अमेरिकी तकनीक होगी और दूसरी तरफ चीन की अपनी 'स्वदेशी' तकनीक, जो अब अमेरिकी मॉडल्स को सीधी टक्कर दे रही है।