बलरामपुर जिले में खरीफ की फसलों की बुवाई और सिंचाई व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। सोमवार को बलरामपुर के जिलाधिकारी (DM) ने राप्ती मुख्य नहर और उससे जुड़ी वितरिकाओं का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जल शक्ति विभाग और नहर खंड के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि मानसून और खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले नहरों की सिल्ट सफाई का काम शत-प्रतिशत पूरा कर लिया जाए ताकि किसानों को सिंचाई के लिए पानी की किल्लत न हो।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने नहर की सफाई की गुणवत्ता पर असंतोष जाहिर किया और संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि नहरों की सफाई केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर दिखनी चाहिए। डीएम ने निर्देश दिया कि राप्ती नहर परियोजना के अंतर्गत आने वाले सभी माइनरों और अंतिम छोर (टेल) तक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। अक्सर शिकायतें आती हैं कि नहर के ऊपरी हिस्से में तो पानी रहता है, लेकिन दूर-दराज के खेतों तक पानी नहीं पहुँच पाता, जिससे सीमांत किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग के अभियंताओं को आदेश दिया कि वे खुद मौके पर जाकर नहरों की सफाई की निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि कहीं भी कूड़ा-करकट या झाड़ियां पानी के बहाव को न रोकें। उन्होंने यह भी कहा कि खरीफ की फसल जैसे धान की रोपाई के समय पानी की मांग बढ़ जाती है, ऐसे में रोस्टर के अनुसार नहरों का संचालन किया जाए। यदि किसी क्षेत्र में अवैध पंपिंग या नहर काटने की घटना सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए।
इस प्रशासनिक तत्परता से जिले के किसानों में उम्मीद जगी है। बलरामपुर एक कृषि प्रधान जिला है और यहाँ की बड़ी आबादी अपनी आजीविका के लिए राप्ती नहर प्रणाली पर निर्भर है। समय पर सिंचाई का पानी मिलने से न केवल पैदावार अच्छी होगी, बल्कि किसानों को निजी पंपिंग सेटों पर होने वाले भारी खर्च से भी राहत मिलेगी। डीएम ने स्पष्ट किया कि सिंचाई व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों और ठेकेदारों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। विभाग को एक सप्ताह के भीतर सफाई कार्य की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी अल्टीमेटम दिया गया है।