बहराइच: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में स्थित कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के जंगलों को आग से बचाने के लिए अब आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। वन विभाग ने जंगलों में लगने वाली भीषण आग की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सैटेलाइट आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। 4 मई, 2026 को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, इस तकनीक के जरिए जंगल के किसी भी हिस्से में आग लगते ही वन अधिकारियों के पास तुरंत अलर्ट पहुँच जाएगा, जिससे कम से कम समय में उस पर काबू पाया जा सके।
कतर्नियाघाट का जंगल अपनी जैव विविधता और दुर्लभ वन्यजीवों के लिए जाना जाता है, जहाँ गर्मियों के मौसम में आग लगने का खतरा काफी बढ़ जाता है। सैटेलाइट मॉनिटरिंग के तहत, भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) के माध्यम से रीयल-टाइम डेटा प्राप्त किया जाएगा। जैसे ही सैटेलाइट जंगल के किसी हिस्से में असामान्य तापमान या धुएं का पता लगाएगा, वह तुरंत संबंधित क्षेत्र के रेंजर और वन रक्षकों के मोबाइल पर जीपीएस लोकेशन के साथ सूचना भेज देगा। इससे वन विभाग की टीम को बिना समय गंवाए सटीक स्थान पर पहुँचने में मदद मिलेगी।
तकनीक के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। कतर्नियाघाट के संवेदनशील इलाकों में 'फायर वॉच टावर' बनाए गए हैं और बड़ी संख्या में 'फायर वाचर' तैनात किए गए हैं। ये वाचर न केवल अपनी आंखों से निगरानी रखते हैं, बल्कि सैटेलाइट अलर्ट मिलते ही रिस्पांस टीम को दिशा-निर्देश भी देते हैं। विभाग ने आग बुझाने के आधुनिक उपकरणों और फायर लाइनों की सफाई का काम भी पूरा कर लिया है, ताकि आग को एक ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक में फैलने से रोका जा सके।
वन अधिकारियों का कहना है कि पहले सूचना मिलने में देरी होने के कारण काफी बड़ा जंगली इलाका जलकर राख हो जाता था, जिससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुँचता था। लेकिन अब सैटेलाइट तकनीक के कारण रेजपॉन्स टाइम काफी कम हो गया है। इसके अलावा, स्थानीय ग्रामीणों को भी जागरूक किया जा रहा है कि वे जंगल के आसपास सूखी घास या आग न जलाएं, जिससे अनजाने में कोई बड़ी घटना न हो जाए।
यह आधुनिक पहल न केवल कीमती वन संपदा को सुरक्षित रखेगी, बल्कि बाघ, तेंदुए और हाथियों जैसे संरक्षित जीवों के जीवन को भी सुरक्षा प्रदान करेगी। बहराइच का वन विभाग अब पूरी तरह 'हाई-अलर्ट' मोड पर है और रीयल-टाइम डेटा के जरिए हर गतिविधि की निगरानी की जा रही है। तकनीक और मानव बल का यह संगम कतर्नियाघाट के जंगलों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा है।