बाराबंकी : जिले के स्वास्थ्य विभाग ने ऊर्जा संरक्षण और वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए एक अनूठी कार्य संस्कृति विकसित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मंत्रियों और अधिकारियों से सप्ताह में कम से कम एक दिन सार्वजनिक वाहनों का उपयोग करने की अपील के बाद, स्वास्थ्य विभाग ने भी इसे जमीनी स्तर पर लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी और निजी वाहनों के अनावश्यक उपयोग को कम कर समाज में एक सकारात्मक संदेश देना है।
नई गाइडलाइन के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वे सप्ताह में कम से कम एक दिन कार्यालय आने के लिए साइकिल, ई-रिक्शा या सार्वजनिक बसों का उपयोग करें। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) तक, इस नियम को प्रभावी ढंग से लागू करने की योजना है। इससे न केवल पेट्रोल-डीजल की खपत कम होगी, बल्कि स्वास्थ्य कर्मियों की फिटनेस में भी सुधार होगा।
विभाग ने यह भी निर्णय लिया है कि आधिकारिक दौरों या फील्ड विजिट के दौरान वाहनों के बड़े काफिलों के बजाय 'कार पूलिंग' (एक ही वाहन में साझा यात्रा) को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि एक ही रूट पर कई अधिकारियों को जाना है, तो वे अलग-अलग गाड़ियों के बजाय एक ही वाहन का उपयोग करेंगे। इससे सरकारी संसाधनों की बचत होगी और सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा।
ईंधन और समय बचाने के लिए विभाग अब अधिकांश प्रशासनिक बैठकों को 'हाइब्रिड मोड' या पूरी तरह से 'डिजिटल' माध्यम से आयोजित करने पर जोर दे रहा है। जिला मुख्यालय से दूर स्थित ब्लॉकों के प्रभारियों को अब छोटी बैठकों के लिए बार-बार मुख्यालय आने की जरूरत नहीं होगी, जिससे सरकारी वाहनों के परिचालन में भारी कमी आएगी। इसके साथ ही कार्यालयों में एसी (AC) का तापमान 24 से 26 डिग्री के बीच रखने के भी निर्देश दिए गए हैं ताकि बिजली की बचत की जा सके।
स्वास्थ्य विभाग की यह पहल अन्य विभागों के लिए भी एक उदाहरण पेश कर रही है। बाराबंकी प्रशासन का मानना है कि यदि सरकारी कर्मचारी और अधिकारी अपनी जीवनशैली में ये छोटे बदलाव लाते हैं, तो इससे पर्यावरण को बड़ा फायदा होगा। आम जनता भी अपने स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति जागरूक होगी, जिससे 'स्वच्छ बाराबंकी-स्वस्थ बाराबंकी' के संकल्प को मजबूती मिलेगी।