सूरत: गुजरात के सूरत में NEET (National Eligibility cum Entrance Test) परीक्षा केंद्र पर उस समय भारी विवाद खड़ा हो गया, जब चेकिंग के दौरान छात्रों की धार्मिक आस्था से जुड़ी 'कंठी' (तुलसी की माला) उतरवा दी गई। 4 मई, 2026 को आयोजित इस राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा के दौरान हुई इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अभिभावकों और स्थानीय संगठनों ने केंद्र प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस घटना ने परीक्षा के कड़े नियमों और धार्मिक भावनाओं के बीच के संतुलन पर एक नई बहस छेड़ दी है।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब सूरत के एक प्रमुख परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा कर्मियों ने 'ड्रेस कोड' का हवाला देते हुए छात्रों को गले में पहनी गई कंठी उतारने के लिए मजबूर किया। छात्रों और उनके माता-पिता का आरोप है कि नियमों की आड़ में उनकी धार्मिक मान्यताओं का अपमान किया गया है। कई अभिभावकों ने मौके पर ही हंगामा शुरू कर दिया, जिनका कहना था कि कंठी कोई आभूषण नहीं बल्कि उनकी आस्था का अटूट हिस्सा है। स्थिति को बिगड़ता देख स्थानीय पुलिस को भी हस्तक्षेप करना पड़ा, ताकि परीक्षा प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि छात्र और उनके परिजन केंद्र के बाहर अधिकारियों से बहस कर रहे हैं। कई छात्रों ने भावुक होकर बताया कि उन्हें परीक्षा कक्ष में प्रवेश देने से पहले अपनी पवित्र माला त्यागने के लिए कहा गया, जिससे वे मानसिक रूप से काफी तनाव में आ गए। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा के दौरान सुरक्षा और पारदर्शिता जरूरी है, लेकिन इस तरह की संवेदनशीलता का ध्यान रखना भी अनिवार्य है जिससे किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे।
इस पूरे मामले पर हिंदू संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका तर्क है कि अगर सिख छात्रों को कृपाण या कड़ा पहनने की अनुमति दी जा सकती है, तो हिंदू छात्रों की कंठी पर पाबंदी क्यों लगाई गई? संगठनों ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। दूसरी ओर, केंद्र के अधिकारियों का कहना है कि वे केवल NTA द्वारा जारी किए गए सख्त दिशानिर्देशों का पालन कर रहे थे, जिसमें किसी भी प्रकार के धागे या माला को पहनकर अंदर जाने की मनाही है।
सूरत की इस घटना ने एक बार फिर देश में आयोजित होने वाली बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह विवाद न केवल सूरत तक सीमित रहा बल्कि पूरे गुजरात और देश के अन्य हिस्सों में भी इसकी चर्चा हो रही है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि NTA भविष्य की परीक्षाओं के लिए अपने नियमों में धार्मिक प्रतीकों को लेकर कोई विशेष ढील देता है या नहीं, ताकि छात्रों को ऐसी असहज स्थितियों का सामना न करना पड़े।