श्रावस्ती जिले में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण बिल) के समर्थन में जबरदस्त हलचल देखी जा रही है। सोमवार को उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन के बैनर तले व्यापारियों ने भिनगा नगर में एक विशाल मार्च निकाला। यह मार्च केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ऐतिहासिक महिला आरक्षण विधेयक के समर्थन में और सदन में इसके पारित न होने की स्थिति में विपक्ष के अड़ियल रवैये के विरोध में आयोजित किया गया। जिलाध्यक्ष सुभाष सत्या के नेतृत्व में व्यापारियों का हुजूम भिनगा नगर से शुरू होकर कलेक्ट्रेट तक पहुँचा, जहाँ उन्होंने राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन एसडीएम को सौंपा।
प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर "महिलाओं का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान" जैसे नारे लगाए। जिलाध्यक्ष सुभाष सत्या ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह देश की आधी आबादी को उनका वाजिब हक दिलाने वाली एक दूरदर्शी पहल है। उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण मिलने से महिलाओं की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति में युगांतकारी परिवर्तन आएगा। व्यापारियों ने इस बात पर रोष जताया कि विपक्ष की ओर से इस विधेयक में रोड़े अटकाए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर महिला सशक्तिकरण के मार्ग में बाधा है।
संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि व्यापारी समुदाय नारी शक्ति की गरिमा, स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मार्च के दौरान वक्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की सराहना करते हुए कहा कि 2023 में लाया गया यह बिल और अब 2026 में इसके कार्यान्वयन की दिशा में बढ़ते कदम ऐतिहासिक हैं। उन्होंने कहा कि सदियों से हाशिये पर रही महिलाओं को निर्णय लेने वाली प्रक्रियाओं का हिस्सा बनाना ही 'विकसित भारत' की सच्ची पहचान है।
भिनगा की सड़कों पर निकले इस मार्च में व्यापारियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक भी शामिल हुए। कलेक्ट्रेट परिसर में ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रशासन से यह मांग की गई कि इस विधेयक को बिना किसी देरी के प्रभावी रूप से लागू करने का मार्ग प्रशस्त किया जाए। श्रावस्ती में इस तरह के आयोजनों ने एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में महिला आरक्षण के मुद्दे को गरमा दिया है। व्यापारियों का कहना है कि वे तब तक अपना जनजागरण अभियान जारी रखेंगे जब तक इस अधिनियम के माध्यम से महिलाओं को उनका संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता। फिलहाल, इस मार्च और प्रदर्शन के बाद जिले में राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है।